तेनाली राम की २५ सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ | 25 Best Tenali Raman Stories In Hindi
तेनाली राम की २५ सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ | 25 Best Tenali Raman Stories In Hindi
3 : कितने कौवे–Tenali Raman Stories In Hindi
कितने कौवे : एक दिन महाराज कृष्णदेवराय और तेनालीराम दोनों राजदरबार में बैठे थे। महाराज तेनाली को टेढ़े-मेढ़े प्रश्न पूछ रहे थे , उस प्रश्नो के उत्तर तेनाली बहुत ही चतुराई से दे कर महाराज को स्तब्ध कर देते थे। वह दिन इस तरह बड़े आराम से बिता , कुछ दिन बीतने के बाद फिरसे महराज ने तेनाली को बुलाया और प्रश्न पूछते हुए कहा , तेनाली! हमारे विजयगर में सभी मिलाकर कितने कौवे होंगे ! क्या तुम इसका उत्तर दे सकते हो ? तेनालीराम ने बड़े ही निखालस भाव से कहा , जी हुज़ूर जरूर बता सकता हु। महाराज ने कठोर भाव से कहा मुझे सही गिनती चाहिए।
तेनालीराम बोला , महराज एक दम सही गिनती ही बताऊंगा। राजा ने दो दिन की महोलत दी थी , तीसरे दिन तेनाली को राजा के द्वारा पूछे हुए प्रश्न का जवाब देना था। ओर फैसले के दिन सभी नगरवासी को अंदाजा था की तेनालीराम इस उत्तर का जवाब न दे पाएगा , भला परिंदो की गिनती कैसे संभव हैं?
नक्की की हुई तारीख को दरबार फिरसे जमा हुआ , सभी मंत्री , महामंत्री नगरवासी उपस्थित थे। सभी की नज़र तेनालीराम की ओर थी , सभी को उत्तर जानने की बेताबी थी। तेनाली ने उतर देते हुए कहा , महाराज हमारी पूरी राजधानी विजयनगर में एक लाख पचास हजार नौ सौ निन्यानबे कौवे हैं। महाराज मेरे जवाब पर कोई संदेह हो तो आप किसी के जरिए गिनवा सकते हैं।
महराज ने कहा अगर गिनती में भूल हुई तो!! तेनालीराम ने कहा मेरी गिनती में भूल हो ऐसा कुछ हो नहीं सकता। अगर गलती से भी गिनती में कुछ भूल हुई तो उसके पीछे भी कुछ कारण होगा।
तेनाली एक योद्धा – Tenali raman stories : बहुत समय पहले की बात हैं , एक सुप्रसिद्ध योद्धा उत्तर भारत से विजयनगर आया।वह योद्धा पराक्रमी था , उसने अपने बल और ताकत पर कई राजाओ को पराजित किया था और पुरस्कार भी जीत रखे थे। वह आज तक एक ही बार बार पराजित हुआ था। उसकी सारी जिंदगी में वो मल्ल युद्ध में कभी पराजित नहीं हुआ था। विजयनगर आया हुए योद्धा ने विजयनगर के योद्धाओ को लड़ने के लिए ललकारा। उसका शरीर कदावर , लम्बा चौडा एवं शक्तिशाली था।
तेनाली एक योद्धा – Tenali raman stories
इस योद्धा के मुकाबले विजयनगर का कोई भी योद्धा बराबरी न सका। अब बात बढ़ कर विजयनगर की इज़्ज़त और प्रतिष्ठा पर आ चुकी थी। यह बात को लेकर नगर के सभी लोग चिंतित थे। बाहर का आया हुआ वो एक अकेला योद्धा पूरे विजयनगर को चुनौती दे रहा था और विजयनगर की प्रजा कुछ भी नहीं कर पा रही थी।
आखिर में विजयनगर की प्रजा अपनी समस्या लेकर तेनालीराम के पास गए। सभी बात संपूर्ण धैर्य से सुनने के बाद तेनालीरामा ने कहा – ‘सचमुच, एक गंभीर समस्या है, मुख्य बात यह है की उस अनजान योद्धा को तो कोई हमारा योद्धा हरा सकता। मैं एक विदूषक हूं कोई योद्धा नहीं । इस मामले में करू तो क्या करू? ‘तेनालीराम की यह निराशा भरी बात से सभी विजयनगर की प्रजा मायूस हो गइ , क्योंकि सब की एकमात्र आशा तेनालीराम ही था। सभी प्रजाजन बड़ी निराशा के साथ वापिस लौट रहे थे तभी तेनालीराम ने रोका और कहा – ‘मैं उस शक्तिसाली योद्धा से लडूंगा और उसे हराऊंगा भी , परंतु आप सभी प्रजाजन को मुझे एक वचन देना कि ,सभी मेरी आज्ञा का पालन करेंगे ।
‘नगरवासीओ ने उसी वक्त वचन दे दिया ।वचन मिलते ही तेनालीराम बोला- ‘युद्ध के दिन आप सब लोग पदक पहना देना और उस बलवान योद्धा से मेरा परिचय अपने एक गुरु के रूप में करवाना साथ ही मुझे अपने कंधे पर बैठाकर ले जाना। विजयनगर की प्रजा ने तेनालीराम को पूरी तरह से समर्थन दिया। निश्चित किये गए युद्ध के दिन तेनालीराम ने योद्धाओं को एक नारा भी याद करने को कहा, “जो कि इस प्रकार था, ‘ममूक महाराज की जय’, ‘मीस ममूक महाराज की जय”।
तेनाली एक योद्धा – Tenali raman stories
‘तेनालीराम ने अपनी बात बताते हुए कहा – ‘मेरे दिए गए नारे को युद्धभूमि में ले जाते समय मुझे कंधों पर बैठाकर बोलना हैं , सभीको इस नारा जोर-जोर से बोलना है ।’ युद्ध के दिन युद्धभूमि में जोर-जोर से नारा लगाते हुए तेनालीराम को लाया गया , योद्धाओं की इतनी ऊंची आवाज सुनकर उस योद्धा को लगा की यकींनन कोई बड़ा योद्धा मुझसे युद्ध करने आ रहा हैं। नारा के शब्द एक साधारण कविता थी जो कन्नड़ भाषा में था। जिसमें ‘ममूक’ अथार्त – ‘धूल चटाना’ और ‘मीस’ शब्द का अर्थ भी एक जैसा ही था।
मुख्य बात ये हैं की वह योद्धा कन्नड़ भाषा को नहीं समझ पा रहा था। अतः मन-ही मन सोच लिया की बड़ा योद्धा आ रहा हैं। तेनालीराम उस योद्धा के करीब आया और बोला- ‘इससे पहले कि मैं तुम्हारे साथ युद्ध करूं ; तुम्हें मुझे एक प्रश्न का उत्तर देना होगा , तुम्हे मुझे हाव-भावों का अर्थ बताना होगा। वास्तव में सभी बड़े एवं महान योद्धा को इन हाव-भावों का अर्थ ज्ञात होता ही हैं। अगर तुम मेरे प्रश्न “हाव-भावों” का उत्तर देने में कामियाब होंगे तभी मैं तुम्हारे साथ युद्ध करने की चेष्ठा करूंगा। यदि तुम उत्तर देने में असफल रहे तो तुम्हें अपनी पराजय स्वीकार करनी पडेगी।’ विजयनगर के इतने महान योद्धाओं को देख, जो कि तेनालीराम को कंधों पर उठाकर लाए थे और उसे अपना गुरु बता रहे थे साथ ही जोर-जोर से नारा भी लगा रहे थे, उत्तर भारत का यह योद्धा ने सोचा कि अवश्य ही तेनालीराम कोई बहुत ही महान योद्धा है। आखिर में उस योद्धा ने तेनालीराम की बात को समर्थन दिया।
तेनाली राम की २५+ सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ | 25+ Best Tenali Raman Stories In Hindi
तेनाली राम की २५+ सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ | 25+ Best Tenali Raman Stories In Hindi
तेनाली राम की २५ सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ | 25 Best Tenali Raman Stories In Hindi
1 : एक अपराधी – Tenali Raman Stories In Hindi
एक अपराधी : एक दिन की बात हैं , राजा कृष्णदेवराय अपने दरबार में मुखातिब थे , और अपने मंत्री – महामंत्री के साथ चर्चा कर रहे थे। पंडित तेनालीराम भी भरी सभा में हाजिर थे। अचानक चरवाहा भरी सभा में उपस्थित हुआ और महाराज न्याय कीजिए , महाराज न्याय कीजिए ऐसा चिल्लाने लगा। महाराज ने उसे कहा वत्स धीरज रखो , क्या हुआ हैं हमें विस्तार से बताओ।
चरवाहा ने बात रखते हुए राजा से कहा , मेरे सामने एक लोभी आदमी बरसो से रह रहा हैं। जिसके घर की हालत खंडहर जैसी हो जाने के बावजूत वो घर की मरम्मत नहीं करवाता। कल मेरी बकरी उसके घर की दीवाल गिरने से मर गई। ये चरवाहे का एक राजा से निवेदन है की कृपया मेरी सहायता कजिए और मेरी बकरी का हर्जाना दिलवाने में मेरी मदद कीजिए। तेनाली ने सभी बात धीरज से सुनी थी बात पूरी होते ही सहजता से बोलै , महाराज दीवार गिरने के लिए केवल पडोशी ही जिन्मेदार नहीं। राजाने बड़ी ही नवीनता से पूछा तो फिर तुम्हारे नजरिए से दोषी कोन हैं ?
एक अपराधी – Tenali raman stories in hindi
“तेनालीराम ने महाराज से विनंती करते हुए कहा , मुझे इस बात की गहराई को जानने के लिए थोड़ा समय दीजिए तब जाकर में असली गुनेगार को आपके सामने पस्तुत कर दूंगा”
राजा कृष्णदेवराय ने तेनाली की विंनती का मान रखते उसे हुए थोड़ा समय दिया। बात की सबिती के लिए चरवाहे के पडोशी को राज दरबार में बुलाया गया। पड़ोशी ने अपनी सफाइ देते हुए कहा , कृपानिधान में इसके लिए दोषी नहीं हु। यह दीवार मैंने किसी और मिस्त्री के हाथो बनवाई थी तो अपराधी तो वो हुआ। तेनाली ने मिस्त्री को दरबार में बुलवाया , मिस्त्री ने खुद को बचाते हुए राजा से कहा , महाराज में अपराधी नहीं हु।मेरा इस बात से कोई संबध नहीं। असली दोष तो उन मजूर लोगो का हैं जिसकी नियत में खोट थी और ज्यादा पानी के इस्तमाल से ईंट अच्छे से चिपक नहीं पाई जिसकी वजह से दीवार गिर गई। आपको अपनी वसूली के लिए मजूर को बुलाना चाहिए।
एक अपराधी – Tenali raman stories in hindi
राजा के आदेश से सिपाही मजदूर को दरबार में बुला लाए। मजदूर ने स्वयं को बचाते हुए कहा , गुनेगार तो वह पानी वाला व्यक्ति हैं। जिसने अधिक मात्रा में पानी मिलाया था। पानी वाले को दरबार में पैस किया गया , वह बोला महाराज मुझे पानी बड़े बरतन दिया गया था जिसकी वजह से आवयश्कता से अधिक पानी भर गया था , और पानी की मात्रा अधिक होने पर भी ज्ञात न रहा।
मेरे हिसाब से उस व्यक्ति को दोषी ठहरना चाहिए जिसने पानी भरने के लिए मुझे बड़ा सा बरतन दिया था। तेनाली राम ने उस पानी वाले व्यक्ति को कहते हुए पूछा तुम्हे पानी का वह बड़ा सा बरतन कहा से मिला था। पानी वाले आदमी ने सहजता से कहा पानी वाला बरतन मुझे चरवाहे ने दिया था। बड़ा बरतन होने के कारण पानी की मात्रा कितनी हैं यह पता न चला। तेनालीराम ने बड़े ही ठहराव से उस चरवाहे से कहा , यह सब कुछ तुम्हारी वजह से ही हुआ हैं। तुम्हारी एक गलती ने तुम्हारी अपनी बकरी की जान ली हैं।
अंतिम इच्छा – Tenali raman stories in hindi : समय के साथ-साथ राजा कॄष्णदेव राय की माता बहुत वॄद्ध हो गई थीं। एक बार वह बहुत बीमार पड गई। उन्हें लगा कि अब वे शीघ्र ही मर जाएँगी। उन्हें आम से बहुत लगाव था, इसलिए जीवन के अन्तिम दिनों में वे आम दान करना चाहती थीं। अतः उन्होंने राजा से ब्राह्मणों को आम दान करने की इच्छा प्रकट की। वह् समझती थी कि इस प्रकार दान करने से उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होगी।
कुछ दिनों बाद राजा की माता अपनी अन्तिम इच्छा की पूर्ति किए बिना ही मॄत्यु को प्राप्त हो गईं। उनकी मॄत्यु के बाद राजा ने सभी विद्वान ब्राह्मणों को बुलाया और अपनी माँ की अन्तिम अपूर्ण इच्छा के बारे में बताया। कुछ देर तक चुप रहने के पश्चात ब्राह्मण बोले,” यह तो बहुत ही बुरा हुआ महाराज, अन्तिम इच्छा के पूरा न होने की दशा में तो उन्हें मुक्ति ही नहीं मिल सकती। वे प्रेत योनि में भटकती रहेंगी। महाराज आपको उनकी आत्मा की शान्ति का उपाय करना चाहिये।”
अंतिम इच्छा – Tenali raman stories in hindi
तब महाराज ने उनसे अपनी माता की अन्तिम इच्छा की पुर्ति का उपाय पूछा।
शातिर व्यापारी – Tenali raman stories in hindi : एक समय की बात हैं। तेनालीराम और महाराज कृष्ण्देवराय से वर्तालाप में उलजे हुए थे , तभी राजा ने अचानक तेनालीराम से पूछा, ‘तेनाली , यह बताओ कि किस प्रकार के लोग किस प्रकार के लोग सबसे अधिक सयाने और अधिक मूर्ख होते हैं?’ हमे यह दो प्रश्नो के उत्तर किसी सबूत से साथ चाहिए। तेनालीराम ने राजा को तभी उत्तर दिया, ‘महाराज! ब्राह्मण सबसे अधिक मूर्ख और ज्यादातर व्यापारी सबसे अधिक सयाने होते हैं।’ राजा ने कहा प्रमाण क्या हैं? ‘तेनाली ने बड़े ही ठहेराव से महाराज से कहा में ये सबित कर सकता हु। राजा ने पूछा कैसे?।तेनालीराम ने दरबारी को आदेश दिया की राजगुरु को बुलवाइए।’राजगुरु कक्ष में आ गए। तेनालीराम ने कहा,‘महाराज, मैं अपनी बात की साबीती अभी इसी वक्त करूंगा परंतु शर्त यह की, आप दखल न देते हुए बस देखेंगे।
आप मुझे दखल न करने का वचन दें, बाद ही में काम शुरुआत करूँगा।’ राजा ने तेनालीराम की स्वीकारते हुए कहा , ठीक हैं। तेनालीराम ने बड़े ही आदर से राजगुरु के पास उसकी चोटी मांगते हुए कहा, ‘राजगुरु जी,महाराज को आपकी चोटी की आवश्यकता है। आपकी चोटी के बदले बड़ा अच्छा इनाम दिया जाएगा।’
शातिर व्यापारी – Tenali raman stories in hindi
राजगुरु तेनाली की यह अजीब बात से गुस्से से बोले, में अपनी पाली हुई प्यारी चोटी को ऐसे ही कैसे कटवा सकता हु? लेकिन ....
द्रोही राजगुरु – tenali raman stories in hindi : तेनालीराम के सभी काम और प्रतिभा से विजयनगर के राजगुरु परेशान थे , क्योकि राजगुरु को हर कुछ दिन तेनालीराम की वजह से जुकना पड़ता था। इसी कारण वो राजदरबार में हास्य पात्र बनता था। राजगुरु तेनालीराम के पद , पत्तिभा एवं प्रतिष्ठा से जलते थे और तेनालीराम महाराज के मुर्त्युदंड से भी कई बार अपनी सुजबुझ से बच निकला हैं। इस लिए राजगुरु ने सोचा में स्वयं ही मौका देख कर तेनाली के प्राण ले लू। अपने कुटिल मन से तेनालीराम को मारने की योजना बनाई। यात्रा का बहाना करके विजयनगर से निकल गए। एक बहरूपिए के पास मदद मांगने के हेतु से जा पहुंचे।
कुछ समय के बाद राजगुरु उस बहरूपिए के साथ रह कर भेष बदल ने में कुशल हो गए। राजगुरु जब महल वापस लौटे तभी अपनी योजना के आधीन बहरूपिए बन कर आए। उसने राजा कृष्ण्देवराय से अपना परिचय बताते हुए स्वयं को एक कलाकार बताया। महाराज ने कहा तुम्हे सबसे अच्छा क्या आता हैं , बहरूपिए ने महाराज से कहा “मुझे शेर का स्वांग बहुत अच्छी तरह से आता है परंतु उसमे खतरा हैं”। कोई घायल तो कोई जान भी गवा सकता हैं। उसी के साथ बहरूपिए ने अपनी शर्त महाराज के सामने रखते हुए कहा की , मेरा एक खून आपको माफ़ करना होगा। महाराज ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।
द्रोही राजगुरु – tenali raman stories in hindi
‘’और एक शर्त महाराज , ऐसा कह कर महाराज के सामने शर्त रखी। मेरी कलाकारी एवं स्वांग के दौरान पंडित तेनालीराम भी राजदरबार में हाज़िर रहें...